— अरविन्द मोहन
आप चुनाव के मामले में है बीजेपी से कमज़ोर नहीं है क्योंकि शासन का उसका रिकार्ड बहुत बढ़िया हो न हो भाजपा ही राज्यों से बेहतर है। भाजपाई शासन जहां-जहां है वहां बिजली पानी से लेकर क़ानून व्यवस्था की स्थिति बदतर हुई है। इन सब मामलों में, शिक्षा में जो स्थिति है दिल्ली की है वह की स्थिति यूपी हरियाणा से बेहतर है।
चुनावी सुगबुगाहट तो बिहार में भी कब से शुरू है जहां अगले साल अक्टूबर से पहले विधानसभा चुनाव होना है और इसकी तैयारी चल रही है । लेकिन सबसे तेज़ हलचल राजधानी दिल्ली में है जहां कभी भी चुनावों की घोषणा हो सकती है। इससे भी बड़ी बात ये है कि वहां जिन दो पार्टियों के बीच चुनावी मुकाबला है अर्थात भाजपा और आप, वे साल भर और 24 घंटे चुनावी मूड में रहने वाली पार्टियां हैं। इन दोनों पार्टियों ने लगातार एक दूसरे के खिलाफ़ मोर्चा खोल रखा है और इसी का परिणाम है कि चुनाव घोषित नहीं हुए और लगभग चुनाव प्रचार शुरू हो गया है। उम्मीदवारों के नाम घोषित होने लग गए है और कार्यक्रमों की झड़ी लग गई है कहना न होगा कि इस काम में भाजपा पूरे पांच साल से लगी हुई है और उसने आप की राज्य सरकार को गिराना है और उसके नाक में दम करने में अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ी है। कई बार उसकी कोशिशें संसदीय मर्यादाओं के उलट भी हुई है और सब किसी को ये लगता है कि ये क़दम है आप के नेताओं को परेशान करने के लिए उठाए जा रहे हैं तो किसी को भी यह समझने में दिक़्क़त नहीं होती है न कि किस तरह से आप ने भाजपा को पराजित किया है।
भाजपा के लिए यह ज़्यादा परेशानी की बात है क्योंकि नरेन्द्र मोदी का डंका पूरे देश में बजता है लेकिन बार-बार दिल्ली मैं उनको पराजय झेलनी पड़ती है। उससे पहले भी दिल्ली में लगातार पंद्रह साल कॉंग्रेस की सरकार रही है। इस तरह से भाजपा बीते पच्चीस वर्षों से दिल्ली की सत्ता से बाहर रही है। और आप तो आपने उसे स्थानीय निकाय चुनावों में भी बुरी तरह पराजित कर दिया है। इस पराजय के साथ ही यह सच्चाई भी भाजपा को दिखाई देती है कि लोक सभा चुनावों में उसे किसी कि़स्म का दबाव या चुनौती नहीं होती है। इस बार भी भाजपा ने बहुत आसानी से दिल्ली का चुनाव जीता जबकि आप ने कॉंग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था।
इस हिसाब से इस बार के चुनाव ज़्यादा दिलचस्प और करीबी हैं। दिलचस्पी की ख़ास वजह ये है कि इस बार आप का लगभग पूरा नेतृत्व किसी न किसी तरह के गंभीर आरोप से घिरा हुआ है। ख़ुद अरविन्द केजरीवाल, उस पार्टी के नम्बर दो माने जाने वाले मनीष सिसोदिया और लगभग पूरी पुरानी कैबिनेट दागदार हुआ है। यह ज़रूर है कि प्रवर्तन निदेशालय, सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग/दुरुपयोग करने के बावजूद केंद्र सरकार आप के नेताओं के खिलाफ़ कोई ख़ास सबूत या मुक़दमा खड़ा नहीं कर पाई है। सभी लोग ज़मानत पर छूटे हैं और अभी भी मुक़दमे चल रहा है।
इनका क्या होगा यह भविष्यवाणी करना तो मुश्किल है लेकिन इतना कहने में कोई हर्ज नहीं है कि आप के ज़्यादातर बड़े नेताओं का दामन दाग़दार हो चुका है भ्रष्टाचार ख़त्म करने के जिस बुनियादी दावे के साथ उन्होंने राजनीति शुरू की थी वह ख़त्म हो गई है। सादगी का नाम लेना भी अब उनके लिए उल्टा पड़ता है। उनके नेताओं के बारे में भाजपा सरकार गिराने में सफल हुई हो न हुई हो लेकिन उसने आप के नेताओं की साख ज़रूर गिराई है। और इसी का परिणाम है कि आज अरविंद केज़रीवाल ने मुख्यमंत्री पद छोड़कर लोगों की अदालत में जाने की घोषणा की है जिससे भी भाजपाई नाटक बताते हैं। ख़ुद भाजपा उपराज्यपाल से लेकर सारे पदों का किस तरह दुरुपयोग कर रही है यह भी किसी बड़े घटिया नाटक से कम नहीं है क्योंकि राज्यपाल को भी बार-बार अदालतों से फटकार मिल रही है। जो क़दम वो उठाते हैं उसे क़ानूनी रूप से ग़लत बताया जाता है। ख़ुद वे अदालतों से छुपते फिर रहे हैं क्योंकि जो बयान वे दे रहे हैं उसका झूठ अदालतें जानती है।
आप चुनाव के मामले में है बीजेपी से कमज़ोर नहीं है क्योंकि शासन का उसका रिकार्ड बहुत बढ़िया हो न हो भाजपा ही राज्यों से बेहतर है। भाजपाई शासन जहां-जहां है वहां बिजली पानी से लेकर क़ानून व्यवस्था की स्थिति बदतर हुई है। इन सब मामलों में, शिक्षा में जो स्थिति है दिल्ली की है वह की स्थिति यूपी हरियाणा से बेहतर है। दिल्ली काफ़ी कुछ लुटा के भी, लोगों में बांट के भी, स्वास्थ्य और शिक्षा के मामले में बेहतर स्थिति में है। शिक्षा का मामला हो स्वास्थ्य का, वृद्धावस्था पेंशन का मामला हो, दूसरी सहूलियतों का मामला हो, दिल्ली अभी भी देश के बाक़ी राज्यों से बेहतर है। हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार रही है वहां भी बिजली महंगी है। मुफ़्त बिजली वाली बात तो है ही नहीं। वहां की सड़कों की हालत बदतर है। वहां के स्कूल किसी भी तरह से दिल्ली के स्कूलों से टक्कर नहीं ले सकते। शासन का यह रिकॉर्ड आप को भाजपा के मुक़ाबले मज़बूत स्थिति में लाता है।